top of page
fegbfdf.png
Where Is God’s Place PART-1 (hindi)

Where Is God’s Place PART-1 (hindi)

₹0.00Price

ई􀊷र का 􀋕ान कहाँ है?􀆐ा वह द्वारका में है—श्रीकृ 􀋁 की वह नगरी, जो समुद्र
के नीचे लु􀉑 हो गई? 􀆐ा वह अयो􀈯ा में है—भगवान श्रीराम की ज􀉉भूिम?
􀆐ा वह उन वनों में है, जहाँ माता सीता ने जीवन िबताया? 􀆐ा वह मंिदरों,
तीथर्यात्राओ,ं पवर्तो,ं निदयो ं या पिवत्र भूिमयो ंमें है? या उ􀈅र इससे कही ंअिधक
गहरा है? इस िवचारो􀈅ेजक आ􀈯ा􀄰􀈏क यात्रा में डॉ. अिभषेक िगलारा एक
ऐसे प्र􀊲 की खोज करते हैं, जो एक सुबह अपने िपताजी के साथ हुई बातचीत
के दौरान अप्र􀈑ािशत रूप से उनके भीतर उ􀈋􀉄 हुआ और उ􀉎ें उनके
जीवन के सबसे गहरे िचंतनों में से एक की ओर ले गया। भगवद्गीता, रामायण,
श्रीमद्भागवत, उपिनषदों, िहंदू दशर्न, 􀊩􀄰􀆅गत अनुभवों और सैंतालीस वष􀅘
में संिचत अवलोकनों के आधार पर वे भूले हुए मंिदरों, लु􀉑 हुई नग􀄯रयों और
उपेिक्षत पिवत्र 􀋕लों के पीछे िछपे एक गहरे स􀈑 की खोज करते हैं।
श्रीकृ 􀋁 ने द्वारका को लु􀉑 􀆐ों होने िदया? िद􀊩 लीलाओं से जुड़े अनेक 􀋕ान आज भी साधारण, िछपे हुए या
अज्ञात 􀆐ों हैं? ई􀊷र 􀋕ानों की तुलना में िशक्षाओं को अिधक सावधानी से सुरिक्षत रखते हुए 􀆐ों िदखाई देते हैं?
श􀄰􀆅शाली कथाओं, आ􀈯ा􀄰􀈏क अंतदृर्ि􀊼यों और 􀊩ावहा􀄯रक िचंतन के मा􀈯म से यह पु􀋑क प्रकट करती है िक
ई􀊷र का सबसे महान उपहार कभी वह 􀋕ान नही ंथा, जहाँ वे चले थे—ब􀄰􀊋 वह ज्ञान था, िजसे वे अपने पीछे छोड़
गए। यह पु􀋑क साधकों, भ􀆅ों, िचंतकों और उन सभी के िलए है, जो परमा􀈏ा के साथ एक गहरे संबंध की खोज
कर रहे हैं। 􀆐ो􀍤िं क कभी-कभी िजस उ􀈅र की हम खोज कर रहे होते हैं, वह िकसी मंिजल पर नही ं िमलता। वह
एक धीमी फु सफु साहट में िमलता है। और कभी-कभी ई􀊷र उस प्र􀊲 का उ􀈅र देते हैं, िजसके िवषय में हमें 􀋢यं
भी पता नही ं होता िक हम उसे अपने भीतर िलए हुए हैं। ई􀊷र का 􀋕ान कहाँ है? पिवत्र 􀋕ानो ं से िद􀊩 उप􀄰􀋕ित
तक की यात्रा।

    No Reviews YetShare your thoughts. Be the first to leave a review.

    You Might Also Like

    bottom of page