Train Your Eyes, Train Your Destiny (HINDI)
अपनी आँखों को प्रिशिक्षत करें। अपनी िनयित को प्रिशिक्षत करें। आप
अपने शरीर को प्रिशिक्षत करने के िलए ायामशाला जाते हैं। आप
अपनी ास को प्रिशिक्षत करने के िलए ान करते हैं। आप अपने
कौशल को प्रिशिक्षत करने के िलए काम करते हैं। लेिकन इन सभी में
सबसे शशाली प्रिशक्षण को भुला िदया गया है: आँखों का प्रिशक्षण।
यह पुक एक ऐसे स को सामने लाती है िजस पर चचार् करने का
साहस बहुत कम लोग करते हैं: आपकी आँखें आपके कमर् का िनणर्य
करती हैं। आपका कमर् आपके जीवन का िनणर्य करता है। जयपुर की
आभूषण गिलयों से लेकर आाक साधना के मौन अनुशासन तक,
अिभषेक नाथ िगलारा अपने जीवन के वािवक और सीधे अनुभवों से
सीखे गए पाठ साझा करते हैं:
प्रेक मिहला को गरमा और सान की दृि से कै से देखें; दृि के प्रिशक्षण के माम से वासना और प्रलोभन को
कै से समा करें; सोशल मीिडया को लत का साधन नही,ं ब िवकास का उपकरण कै से बनाएँ ; एक िडज़ाइनर
की ऐसी दृि कै से िवकिसत करें जो हर जगह प्रेरणा देख सके ; िनयित की शुरुआत लो ंसे नही,ं ब दृि से कै से
होती है। यह पुक उपदेश नही ंहै। यह अास है। यह पुक पाठक को अपनी दृि को पुनः प्रिशिक्षत करने की
चुनौती देती है: छोटे राे खोजना बंद कीिजए; ैमर खोजने के िलए हर ओर नज़र दौड़ाना बंद कीिजए; दूसरों की
ीकृ ित के पीछे भागना बंद कीिजए। अपनी आँखों को प्रिशिक्षत कीिजए िक वे देखें—अनुशासन, िडज़ाइन, अवसर,
िवनम्रता और आाकता। िजस की आँखें भटकती नही ंहैं—उसे संसार िडगा नही ंसकता। आप वही बन
जाते हैं िजसे आप देखते हैं। इसिलए अपनी दृि का चुनाव बुद्धमानी से कीिजए।
































