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FASHION IS IN OUR BLOOD (hindi)

FASHION IS IN OUR BLOOD (hindi)

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फै शन हमारे खून में है कै से भारतीय परंपराओं ने पहनावे, श्रृंगार और सुंदरता को
जीवन जीने का एक तरीका बनाया—मानिसक और शारी􀄯रक रूप से हमारा पोषण
करते हुए गाँवों और आिदवासी समुदायों में काम करने वाली भारतीय मिहलाएँ ऐसे
आभूषण 􀆐ो ं पहनती थी ं िज􀉎ें आज की कई आधुिनक दु􀊥नें के वल िववाह के
िलए सुरिक्षत रखती हैं? आभूषण, रंग, व􀋓, फू ल, सुगंध, साज-स􀇍ा और अनु􀊿ान
भारतीय दैिनक जीवन के इतने श􀄰􀆅शाली िह􀋣े 􀆐ों बन गए? और हमारी स􀉷ता
ने इनमें से इतनी सारी प्रथाओं को ऐसी परंपराओं में 􀆐ों बदल िदया जो पीिढ़यों
तक जीिवत रही?ं फै शन हमारे खून में है में डॉ. अिभषेक िगलारा फै शन को के वल
चलन, िवलािसता या सामािजक प्रदशर्न के रूप में देखने से आगे बढ़ते हैं और इसे
भारतीय स􀉷ता की एक जीिवत अिभ􀊩􀄰􀆅 के रूप में खोजते हैं। साधारण घरेलू
काय􀅘 में लगी, भारी आभूषणों से सजी आिदवासी मिहलाओं की पुरानी त􀋢ीरों से
शुरुआत करते हुए, वे भारतीय पहनावे, आभूषणों, व􀋓ों, िश􀊙कला, क्षेत्रीय पहचान,
अनु􀊿ानों, मनोिवज्ञान और िवरासत में िमली सं􀋋ृ ित की सिदयों लंबी यात्रा करते हैं।
एक आभूषण िडज़ाइनर और बहु-पीढ़ीगत िवरासत परंपरा के संरक्षक के रूप में अपने 􀋢यं के जीवन से प्रेरणा लेते हुए, वे
एक गहरा प्र􀊲 पूछते हैं: 􀆐ा होगा यिद भारतीयो ं के िलए फै शन कभी के वल फै शन था ही नही?ं 􀆐ा होगा यिद यह एक ऐसी
􀊩व􀋕ा थी िजसके मा􀈯म से सुंदरता, पहचान, 􀋝ृित, िश􀊙कला, सामािजक जुड़ाव और दैिनक अनुशासन 􀋢यं जीवन में
बुने गए थे? यह पु􀋑क प्राचीन परंपराओं से जुड़े अितशयो􀄰􀆅पूणर् दावों को भी चुनौती देती है। हर परंपरा को “वैज्ञािनक”
कहने के बजाय, यह ऐितहािसक प्रमाण, सां􀋋ृ ितक मा􀉊ता और आधुिनक शोध के बीच अंतर करती है—और तकर् देती है
िक भारतीय िवरासत ईमानदारी से अ􀈯यन िकए जाने पर कमजोर नही,ं ब􀄰􀊋 अिधक मजबूत होती है। पाँच गहन िचंतनशील
अ􀈯ायों में यह पु􀋑क खोजती है िक कै से: • प्राचीन भारतीय अलंकरण पहचान और जुड़ाव की भाषा बन गया, • परंपराओं
और अनु􀊿ानों ने दोहराए जाने वाले 􀊩वहारों को पीिढ़यों तक जीिवत रखने में सहायता की, • व􀋓ों और आभूषणों ने जलवायु,
आराम, गितिविध और िश􀊙कला के साथ तालमेल बनाया, • अ􀇅ी तरह तैयार होना आ􀈏-धारणा, आ􀈏िव􀊷ास, 􀋝ृित और
भूिमका की पहचान को प्रभािवत कर सकता है, • पा􀄯रवा􀄯रक िवरासत की व􀋑ुएँ भावना􀈏क और सां􀋋ृ ितक 􀋝ृित की वाहक
बन सकती हैं, • कारीगर स􀉷तागत ज्ञान के जीिवत पु􀋑कालयों के रूप में कायर् करते हैं, • िवरासत अपनी आ􀈏ा खोए िबना
􀊩ावसाियक रूप से प्रासंिगक रह सकती है, • और आधुिनक भारत िकसी और की नकल बने िबना वैि􀊷क बन सकता है। यह
पु􀋑क हमें आँख बंद करके अतीत में लौटने के िलए नही ंकहती। यह हमें कु छ अिधक बु􀄰द्धम􀈅ापूणर् करने का आह्वान करती
है: अतीत को समिझए। उसकी बु􀄰द्धम􀈅ा को संरिक्षत कीिजए। उसकी कमजो􀄯रयों पर प्र􀊲 उठाइए। उसकी अिभ􀊩􀄰􀆅 को
आधुिनक बनाइए। और उसके सवर्श्रे􀊿 िह􀋣े को आगे बढ़ाइए। 􀆐ो􀍤िं क िवरासत वह नही ं है जो हमारे पूवर्ज हमारे पीछे छोड़
गए। िवरासत वह है िजसे हम सफलतापूवर्क अपने ब􀇄ों तक पहुँचाते हैं। और शायद सबसे श􀄰􀆅शाली सीख सबसे सरल है:
सुंदर जीवन जीने के िलए िकसी अवसर की प्रतीक्षा मत कीिजए। जीवन 􀋢यं ही अवसर है।

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