जाको राखे साइयां Why Divine Protection Is Greater Than Human Conspiracy
“जाको राखे साइयां, मार सके न कोय। बाल न बांका कर सके , जो जग बैरी होय॥”
ा वाव में ईर मनु की रक्षा करते हैं? ा िनयित को षड्यंत्रों से बदला जा
सकता है? ा धमर् अंततः अधमर् पर िवजय प्रा करता है? और ा जीवन की
किठन परितयाँ वाव में िकसी बड़े उद्दे का िहा होती हैं? इन प्रों के
उर खोजती है यह प्रेरणादायक और िचंतनशील पुक। चंद्रहास और धृबुद्ध
की अमर कथा के माम से डॉ. अिभषेक िगलारा हमें मानव भाव, ईार्, भय,
सा, िवास, कमर्, िनयित और ईरीय संरक्षण के गहरे आयामों से परिचत कराते
हैं।यह पुक के वल एक पौरािणक कथा नही ं है। यह जीवन का दशर्न है। यह
िवास का संदेश है।
यह धमर् की िवजय का प्रमाण है। यह उन सभी लोगों के िलए आशा का स्रोत है जो कभी अाय, िवरोध, असफलता, षड्यंत्र
या किठन परितयों का सामना कर चुके हैं।
इस पुक में आप जानेंगे—
• चंद्रहास और धृबुद्ध की प्रेरणादायक कथा
• ों बुरे इरादे अंततः यं को ही न करते हैं
• धमर् और चरत्र की वािवक श
• ईार् और भय कै से िनणर्यों को भ्र कर देते हैं
• किठन परितयों में िवास बनाए रखने का मह
• ों कई बार असफलताएँ ही भिव की सफलताओं का मागर् बनती हैं
• ईर की कृ पा, िनयित और सही समय का गहरा संबंध
आाकता, नेतृ, जीवन-दशर्न और भारतीय ज्ञान परंपरा का सुंदर संगम प्रुत करती यह पुक पाठकों को यह
समझने में सहायता करती है िक जीवन में सब कु छ हमारे िनयंत्रण में नही ं होता, लेिकन िवास, चरत्र और धमर् हमेशा
हमारे हाथ में होते हैं।
और जब ये हमारे साथ हो,ं तब संसार की कोई श हमें हमारे वािवक उद्दे से दू र नही ंकर सकती।
ोिं क—
“जाको राखे साइयां, मार सके न कोय।”
































