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ईयर मैनेजमेंट (EAR MANAGEMENT) Hindi

ईयर मैनेजमेंट (EAR MANAGEMENT) Hindi

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जो आप सुनते हैं, उसकी रक्षा करें, इससे पहले िक वही आपकी पहचान बन जाए।􀆐ा हो यिद आपके भिव􀋈 को सबसे अिधक प्रभािवत करने वाली श􀄰􀆅 वही हो, िजसके बारे में आप सबसे कम सोचते हों?आपके कान।प्रितिदन हजारों श􀉨...हजारों िवचार...अनिगनत बातचीत...समाचार...सोशल मीिडया की सामग्री...भय...िशकायतें...िशक्षाएँ...और नए-नए िवचार...एक ही द्वार से आपके मन में प्रवेश करते हैं—आपके कानों के मा􀈯म से।अिधकांश लोग कभी यह प्र􀊲 ही नही ंपूछते िक वे 􀆐ा सुन रहे हैं।और उससे भी कम लोग यह समझते हैं िकिजसे हम बार-बार सुनते हैं, वही धीरे-धीरे हमारी सोच बन जाता है।और...िजसे हम बार-बार सोचते हैं, अंततः वही हमारा 􀊩􀄰􀆅􀈕 बन जाता है।“ईयर मैनेजमेंट” में डॉ. अिभषेक िगलारा एक अ􀈑ंत 􀊩ावहा􀄯रक और जीवन-प􀄯रवतर्नकारी दशर्न प्र􀋑ुत करते हैं, जो हमें नकारा􀈏क प्रभावों से अपने मन की रक्षा करना िसखाता है और साथ ही ज्ञान, शांित, श्रे􀊿 च􀄯रत्र तथा िनरंतर िवकास के बीज जानबूझकर बोना भी िसखाता है।“बीज और खरपतवार” की प्रभावशाली उपमा के मा􀈯म से यह पु􀋑क बताती है— • 􀆐ों बार-बार सुनना हमारी पहचान का िनमार्ण करता है। • कै से नकारा􀈏क प्रभाव चुपचाप हमारी सोच पर िनयंत्रण 􀋕ािपत कर लेते हैं। • श्रवण-अनुकू लन (Auditory Conditioning) और मानिसक प्रोग्रािमंग के पीछे का वैज्ञािनक आधार।• स􀈖ंग, आ􀈯ा􀄰􀈏क िशक्षाओं और सकारा􀈏क वातावरण का वा􀋑िवक मह􀈕। • जीवन पर हावी होने से पहले मानिसक खरपतवार की पहचान और उसे हटाने की िविध। • 􀆐ों प्रातःकाल का श्रवण पूरे िदन की गुणव􀈅ा बदल सकता है। • आधुिनक सूचना-प्रधान संसार में सही जानकारी चुनने का 􀊩ावहा􀄯रक ढाँचा। • ऐसा वातावरण कै से बनाया जाए जो 􀋢ाभािवक रूप से िवकास, सफलता और आंत􀄯रक शांित को समथर्न दे। सनातन आ􀈯ा􀄰􀈏क ज्ञान, आधुिनक मनोिवज्ञान, तंित्रका िवज्ञान (Neuroscience), 􀊩􀄰􀆅गत अनुभवों और जीवन के 􀊩ावहा􀄯रक सूत्रों का सुंदर सम􀉋य करते हुए यह पु􀋑क एक अ􀈑ंत सरल, लेिकन जीवन बदल देने वाला संदेश देती है—आप वही बनते हैं, िजसे आप बार-बार अपने कानों के मा􀈯म से अपने भीतर प्रवेश करने देते हैं।यिद आप अपने िवचार बदलना चाहते हैं—तो अपने श्रवण की रक्षा कीिजए।यिद आप अपना च􀄯रत्र बदलना चाहते हैं—तो अपने श्रवण की रक्षा कीिजए।यिद आप अपना भा􀆶 बदलना चाहते हैं—तो अपने श्रवण की रक्षा कीिजए।􀆐ो􀍤िं क...हर फसल की शुरुआत एक बीज से होती है। और...हर बीज सबसे पहले हमारे कानों के मा􀈯म से हमारे मन में प्रवेश करता है।मन एक बगीचा है।हर श􀉨 या तोएक बीज है...या एक खरपतवार।िनणर्य आपका है िक आप िकसे उगाना चाहते हैं।

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