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REWRITING A 100-YEAR LEGACY_ WHEN TRADITION WENT PUBLIC — PART 9 hindi

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भारत की सबसे बड़ी संपदा उसके हाथों में हैभारत के पास िव􀊷-􀋑रीय कारीगरों

की असीम संपदा है—हमारी भूिमका उ􀉎ें पहचानना, उनका समथर्न करना, उनके

िश􀊙-कौशल की रक्षा करना और उनके कौशल को समृद्ध होने में सहायता देना

है। भारत के पास दुिनया की सबसे बड़ी जनसं􀆥ा है। लेिकन 􀆐ा के वल जनसं􀆥ा

ही दुिनया का सबसे बड़ा उपभो􀆅ा बाज़ार बना देती है? डॉ. अिभषेक िगलारा का

मानना है िक अिधक मह􀈕पूणर् प्र􀊲 यह नही ं है िक भारत में िकतने लोग हैं—ब􀄰􀊋

यह है िक जो कु छ ये लोग पहले से जानते हैं, उसके आधार पर हम िकतना आिथर्क

मू􀊞 सृिजत कर सकते हैं। पूरे भारत में ऐसे कारीगर हैं, जो पीिढ़यों से असाधारण

िवरासत में िमले कौशल को अपने साथ लेकर चल रहे हैं।

िफर भी, जब उनकी क्षमताएँ आधुिनक अथर्􀊩वस्था की आव􀊴कताओ ं के अनुरूप नही ं बैठती,ं तो हम अ􀆛र उ􀉎ें गलती

से “अकु शल” कह देते हैं। 􀆐ा सम􀋟ा हाथ में नही ं है? 􀆐ा सम􀋟ा उस हाथ के आसपास मौजूद बाज़ार में है? राजस्थान

की कुं दन, मीना, पोलकी और जड़ाऊ परंपराओं के साथ अपने प􀄯रवार की एक शता􀉨ी से अिधक लंबी यात्रा से प्रेरणा लेते

हुए, डॉ. िगलारा का मानना है िक िवरासत की रक्षा के िलए के वल प्रशंसा या संरक्षण पयार्􀉑 नही ं है। इसके िलए समृ􀄰द्ध

आव􀊴क है। जीिवत िश􀊙 के िलए ग्राहक आव􀊴क हैं। कारीगर के िलए मजबूत आय आव􀊴क है। पारंप􀄯रक कौशल

के िलए समकालीन रूपांकन आव􀊴क है। एक उ􀇽ृ 􀊼 उ􀈋ाद के िलए िव􀊷ास, 􀊩वस्थाएँ, तकनीक, प्रित􀊿ान-िचह्न िनमार्ण

और बाज़ार आव􀊴क हैं। और भारतीय 􀊩वसाय को इन सभी को जोड़ने वाला सेतु बनना होगा। इसिलए यह पु􀋑क

के वल कारीगरो ं के बारे में नही ं है। यह भारत के 􀊩वसािययो,ं उद्योगपितयो,ं उद्यिमयो,ं रूपांकनकतार्ओ,ं िवक्रे ताओ ं और

प्रित􀊿ान-िचह्नों से एक आह्वान है: एक भारतीय कौशल की पहचान कीिजए। उसके चारों ओर एक आधुिनक बाज़ार का

िनमार्ण कीिजए। उसके कारीगरो ं को समृद्ध बनाइए। और उनकी उ􀇽ृ 􀊼ता को दुिनया तक पहुँचाइए। 􀆐ो􀍤िं क जब कु शल

हाथ अिधक कमाते हैं, तो प􀄯रवार मजबूत होते हैं। जब प􀄯रवार मजबूत होते हैं, तो क्रय श􀄰􀆅 बढ़ती है। जब क्रय श􀄰􀆅

बढ़ती है, तो समुदाय और 􀊩वसाय समृद्ध होते हैं। और जब लाखों लोग के वल जनसं􀆥ा के रूप में िगने जाने से आगे

बढ़कर उ􀈋ादक आिथर्क सहभागी बनते हैं, तो भारत की सबसे बड़ी जनसां􀄰􀆥कीय चुनौती उसकी सबसे बड़ी श􀄰􀆅यों में

से एक बन सकती है। भारतीय िश􀊙-कौशल का भिव􀋈 सहायता पर िनभर्र नही ं होना चािहए। उसे 􀊩ापार होना चािहए।

उसे ग􀄯रमा होना चािहए। उसे वैि􀊷क उ􀇽ृ 􀊼ता होना चािहए। उसे समृद्ध िनरंतरता होना चािहए। भारत को अपने सभी

प्रित􀋙धार्􀈏क लाभ नए िसरे से बनाने की आव􀊴कता नही ं है। कु छ लाभ सिदयो ं से एक हाथ से दूसरे हाथ तक पहुँचते

आए हैं। हमें के वल उ􀉎ें पहचानना है, उ􀉎ें सश􀆅 बनाना है और उ􀉎ें वह बाज़ार देना है, िजसके वे यो􀆶 हैं। हाथों को

खोिजए। बाज़ार बनाइए। समृ􀄰द्ध बाँिटए। 􀆐ो􀍤िं क जब भारत के हाथ समृद्ध होते हैं, भारत समृद्ध होता है।

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