Rewriting a 100-Year Legacy PART-7 (HINDI)
100 वष की िवरासत का पुनलखन — जब परंपरा सावर्जिनक हुई — परवार
को खोए िबना छह पीिढ़यों का पारवारक वसाय बनाने से िमली सीख। एक
पारवारक वसाय को एक शताी से अिधक समय तक जीिवत रहने की
श ा देती है, जबिक हजारों अ एक ही पीढ़ी के भीतर समा हो जाते
हैं? ा वह श्रे रणनीित है, अिधक धन, बेहतर उाद, या इसके पीछे कोई
कही ंअिधक शशाली त काम करता है?
इस अंत गत और िवचारोेजक पुक में, डॉ. अिभषेक िगलारा उन कालातीत िसद्धांतों को साझा करते
हैं िजोनं े एक पारंपरक आभूषण वसाय को पेशेवर गवनस वाले, सावर्जिनक रूप से सूचीबद्ध उद्यम में बदलने
में सहायता की—िबना उन मूो ं का ाग िकए िजोनं े उसे 106 वष से अिधक समय तक सफल बनाए रखा।
वािवक जीवन के अनुभवों को गहरे नेतृ संबंधी िवचारों के साथ जोड़ते हुए यह पुक बताती है िक वाव में
कौन-सी बातें िकसी पारवारक उद्यम को पीिढ़यों तक िटकाए रखती हैं—ों पारवारक संृ ित, पारवारक
िनयंत्रण से अिधक मूवान है; िनरंतर िवकास उरािधकार संबंधी संघष को कै से रोकता है; अगली पीढ़ी द्वारा
माँगने से पहले अवसर ों बनाए जाने चािहए; अहंकार के िबना ािम का मह ा है; वैिक िशक्षा को
कालातीत भारतीय मूों के साथ कै से जोड़ा जाए; कॉरपोरेट गवनस को पारवारक परंपराओं का स्थान लेने के
बजाय उें मजबूत ों करना चािहए; और वे अदृ आदतें कौन-सी हैं जो िवास, एकता और दीघर्कािलक
समृद्ध को संरिक्षत रखती हैं। यह के वल वसाय के बारे में पुक नही ं है; यह संरक्षकता के बारे में पुक है,
ऐसी संस्थाएँ बनाने के बारे में है जो िकसी एक से बड़ी बन जाएँ, असाधारण िवकास का पीछा करते हुए
संबंधो ं को संरिक्षत रखने के बारे में है, और आने वाली पीिढ़यो ं को के वल संपि िवरासत में लेने के िलए नही,ं
ब उसके यो बनने के िलए तैयार करने के बारे में है। चाहे आप उद्यमी हों, वसाय के ामी हों, िकसी
पारवारक उद्यम के सद हों, पेशेवर नेता हों या के वल ऐसा जो अपने पीछे एक साथर्क िवरासत छोड़ना
चाहता हो, यह पुक ऐसी ावहारक बुद्धमा प्रुत करती है जो बोडर्रूम से कही ंआगे तक लागू होती है।
ोिं क अंततः … वसाय िवरासत में िमलते हैं। मू चुने जाते हैं। िवरासत अिजर्त की जाती है।
































